मोरारजी देसाई: वो गांधीवादी PM जिन्होंने इंदिरा गांधी की सत्ता को दी थी चुनौती, जानें अनसुने किस्से
मोरारजी देसाई: वो गांधीवादी PM जिन्होंने इंदिरा गांधी की सत्ता को दी थी चुनौती, जानें अनसुने किस्से
- ✅मोरारजी देसाई की जीवनी: जानें भारत के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री की कहानी, जिन्होंने 1977 में इतिहास रचा। उनके जीवन, संघर्ष और सिद्धांतों की
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भारतीय राजनीति के इतिहास में साल 1977 एक मील का पत्थर माना जाता है। आपातकाल (Emergency) की समाप्ति के बाद जब देश में चुनाव हुए, तो इंदिरा गांधी की सत्ता को उखाड़ फेंकने वाले और देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बनने वाले व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि मोरारजी देसाई थे। मोरारजी एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपना अधिकांश जीवन कांग्रेस में बिताया, लेकिन सिद्धांतों की खातिर कभी समझौता नहीं किया। उनकी ईमानदारी और सख्त गांधीवादी विचारधारा आज भी मिसाल दी जाती है।
मोरारजी देसाई भारत के चौथे प्रधानमंत्री थे, जिनका जन्म 29 फरवरी 1896 को हुआ था। वे देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री बने जो कांग्रेस पार्टी से नहीं थे। उन्होंने 1977 में जनता पार्टी की सरकार का नेतृत्व किया और अपने कार्यकाल के दौरान प्रशासनिक व वित्तीय अनुशासन पर विशेष जोर दिया।
📍 मुख्य अपडेट्स
- जन्म: 29 फरवरी 1896, बुलसर जिला, गुजरात।
- पदभार: भारत के चौथे प्रधानमंत्री (1977-1979)।
- उपलब्धि: पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री और पूर्व उप-प्रधानमंत्री।
- सिद्धांत: कठोर अनुशासन और गांधीवादी मूल्यों के प्रति अटूट निष्ठा।
सरकारी नौकरी छोड़कर आजादी के आंदोलन में कूदे
मोरारजी देसाई का महात्मा गांधी के साथ रिश्ता आजादी से करीब एक दशक पहले ही जुड़ गया था। 1930 के दशक में जब देश में स्वतंत्रता संग्राम चरम पर था, तब देसाई का ब्रिटिश न्याय व्यवस्था से भरोसा उठ गया। उन्होंने देश सेवा के लिए अपनी सुरक्षित सरकारी नौकरी को लात मार दी। उनके लिए परिवार से पहले 'राष्ट्र' था। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्हें तीन बार जेल की हवा खानी पड़ी, लेकिन उनके कदम कभी पीछे नहीं हटे।
| वर्ष | महत्वपूर्ण घटना/पद |
|---|---|
| 1896 | गुजरात के बुलसर में जन्म |
| 1937 | बॉम्बे सरकार में राजस्व मंत्री बने |
| 1952 | बॉम्बे (मुंबई) के मुख्यमंत्री बने |
| 1967 | भारत के उप-प्रधानमंत्री (इंदिरा कैबिनेट) |
| 1977 | भारत के चौथे प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली |
प्रशासनिक सुधार और वित्तीय अनुशासन
मोरारजी देसाई ने वित्त मंत्री रहते हुए देश की अर्थव्यवस्था में कई सुधार किए। उन्होंने फिजूलखर्ची को रोकने के लिए 'मितव्ययिता' (Austerity) का मार्ग अपनाया। उनका मानना था कि जब तक गांवों का गरीब व्यक्ति सम्मानजनक जीवन नहीं जी पाता, तब तक समाजवाद का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने पुलिस प्रशासन को जनता के प्रति जवाबदेह बनाया और 'हलवाहा के लिए भूमि' जैसे क्रांतिकारी कदम उठाए।
इंदिरा गांधी से मतभेद और प्रधानमंत्री पद
मोरारजी देसाई की प्रधानमंत्री बनने की इच्छा कभी छिपी नहीं थी। 1967 में वे इंदिरा गांधी की सरकार में उप-प्रधानमंत्री बने, लेकिन जल्द ही नीतियों को लेकर दोनों में टकराव शुरू हो गया। जुलाई 1969 में जब इंदिरा गांधी ने बिना परामर्श किए उनसे वित्त मंत्रालय वापस ले लिया, तो इसे उन्होंने अपने आत्म-सम्मान पर चोट माना और इस्तीफा दे दिया। अंततः 1977 के चुनावों में जनता पार्टी की जीत के साथ उनका प्रधानमंत्री बनने का सपना पूरा हुआ।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- मोरारजी देसाई का जन्म कब हुआ था?
उनका जन्म 29 फरवरी 1896 को गुजरात के बुलसर जिले में हुआ था। - क्या मोरारजी देसाई पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे?
हाँ, वे 1977 में जनता पार्टी के नेतृत्व में पहले गैर-कांग्रेसी पीएम बने। - मोरारजी देसाई कितनी बार जेल गए?
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वे कुल तीन बार जेल गए थे। - उन्होंने सरकारी नौकरी क्यों छोड़ी थी?
ब्रिटिश न्याय व्यवस्था में विश्वास खोने और गांधीजी के आह्वान पर उन्होंने 1930 में नौकरी छोड़ी। - मोरारजी देसाई ने उप-प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा क्यों दिया?
इंदिरा गांधी द्वारा बिना सलाह लिए उनका विभाग बदलने के कारण उन्होंने आत्म-सम्मान के लिए इस्तीफा दिया। - क्या उन्हें भारत रत्न मिला है?
हाँ, उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजा गया है। - मोरारजी देसाई की मृत्यु कब हुई?
उनका निधन 10 अप्रैल 1995 को हुआ था।
🔗 Reference / Official Source: PM India Official Website
💬 विचार और टिप्पणियाँ (Comments)
मोरारजी देसाई की ईमानदारी के किस्से आज भी प्रेरणा देते हैं। बहुत बढ़िया लेख।
क्या यह सच है कि उन्होंने बजट पेश करने का रिकॉर्ड बनाया था? जानकारी के लिए धन्यवाद।
1977 का दौर भारतीय लोकतंत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण था, देसाई जी ने उसे बखूबी संभाला।
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